शनिवार, 12 सितंबर 2009

आएँगे मेहमान

नयनोँ मेँ सपने तिर आए ,
अधरोँ पर आई मुस्कान ॥
कली - कली खिल उठी हृदय की ,
और उमंगेँ हुईँ जवान ॥
ख़ुशबू सी घुल गई हवा मेँ ,
मादक मौसम आया ।
दूर कहीँ गूँजी शहनाई ,
अंग - अंग बौराया ।
ख़ुशियाँ लिपट गईँ आँचल से ,
साँसोँ मेँ उमड़ा तूफान ॥
मन की सोन चिरैया उड़कर ,
बादल को छू आई ।
शरमा कर गौरैया देखे ,
पानी मेँ परछाई ।
सुध - बुध भूल गई दीवानी ,
प्रीत चढ़ी परवान ॥
प्यास निगोड़ी घिर - घिर आए ,
विकल पपीहा तरसे ।
चोँच उठाकर तके गगन को ,
शायद स्वाती बरसे ।
पल - पल हँसे ,
रोए पल - पल मेँ ,
हो जाए हैरान ॥
दरवाजे पर दस्तक देकर ,
पुरवैया उड़ जाए ।
आँगन मेँ तुलसी का बिरवा ,
गीत ख़ुशी के गाए ।
फिर मुँडेर पर कागा बोले ,
आएँगे मेहमान ॥

1 टिप्पणी:

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

रमेश जी बहुत अच्छी लगी रचना
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